A digital magazine on sexuality in the Global South

Author: Akhil Katyal

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I want to 377 you so bad (and Other Poems)

Mobility and Sexuality

बर्लिन में

जब शाम ढली, हम सभी सड़क के चिराग हो गए। क्रॉयज़बर्ग बस रौशनी था - और सस्ते कबाब - हरी दीवारें, चरमराते दरवाज़े फुटपाथ और लड़के। एक गोरा जर्मन, लम्बा, जिसने…