A digital magazine on sexuality in the Global South

attire and sexuality

Attire and Sexuality

The Editorial: Attire and Sexuality

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लिबास का चयन और सहजता

पहनावे से जुडी नैतिक पुलिसिंग व लैंगिक भेदभाव को लेकर एक लंबा इतिहास रहा है। जहां पुरुषों के लिये उनका पहनावा उनके सामाजिक स्टेटस को दिखाता है वहीँ दूसरी ओर महिलाओ के लिये उनके पहनावे को लेकर मानदंड एकदम अलग है! जोकि महिलाओं के पहनावे के तरिके की निंदा करते हुए एक व्यक्तिगत पसंद पर नैतिक निर्णय बनाते हैं! भारत में कई राज्यों में महिलाएँ या लडकियां कुछ खास तरह के कपड़े नहीं पहन सकती है या फिर मैं ये कहूंगी कि ऐसे कपडे जिसमें वो ज्यादा आकर्शित लगती हों! जबकि पुरुष वही तंग जींस पहन सकते हैं पारदर्शी शर्ट पहनते हैं और धोती पहन सकते हैं!
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Ah, the Seductive Lure of Instagram! #OutfitOfTheDay

Personally, I don’t know if it’s because of how Instagram has evolved, or the people using it, or, well, me. Among its most wonderful sights – jaw-dropping beautiful travel destinations; delicious-looking home-cooked South Indian food neatly arranged on a stainless steel plate; doodles and handicraft – what I love about the platform is watching people, mostly women, dressed up.
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बदलती छवियों के साथ बदलती पोशाके

वह एक ऐसे परिवार में बड़ी हुई थीं जहाँ बनने संवरनें की सराहना की जाती थी, इसलिए कपड़ों के प्रति उनकी चाहत को कभी भी विलासिता की तरह नहीं देखा गया। उनकी माँ की शख्शियत की एक विशिष्ट पहचान, उनकी बड़ी सी बिंदी और सूती साड़ी हमेशा अपनी जगह पर रहती थी, चाहे दिन का कोई भी समय हो, चाहे वो खाना बना रहीं हों, धूप या बारिश में बाहर गई हों, सो रहीं हों या बस अभी ही जागी हों, हंस रहीं हों, या रो रहीं हों। उनकी और उनकी बहन के लिए, उनकी माँ की फैशन को लेकर एक ही सलाह थी, “हमेशा ऐसे तैयार होकर रहो जैसे आप बाहर जा रहे हों, भले ही आप सारा दिन घर पर ही हों।” अपनी माँ की सलाह के बावजूद, वह घर पर ‘गुदड़ी के लाल’ की तरह और बाहर जाते वक़्त ‘सिंडरेला’ की तर्ज़ पर चलने वाली बनी।
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Why Did Men Stop Wearing High Heels?

It was the beginning of what has been called the Great Male Renunciation, which would see men abandon the wearing of jewellery, bright colours and ostentatious fabrics in favour of a dark, more sober, and homogeneous look. Men's clothing no longer operated so clearly as a signifier of social class, but while these boundaries were being blurred, the differences between the sexes became more pronounced.
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Why I Removed My Hijab For a Day

I wear it now merely as a symbol, but it is not sacred. It doesn’t mean anything. It doesn’t define me. I wear it with whatever I wish; strappy tops, skinny jeans, heels, or I don’t wear it if I don’t wish. And this is exactly the position I’ll keep until the next No Hijab Day, when there will be more support, and this issue of forced Hijab will be highlighted again, Inshallah.